Breaking News: आवासीय सोसाइटीयो मे करोड़ों का घोटाला, बैंकों पर मिलीभगत का संदेह

By Anant

TRENDING  | 12:00:00 AM

title

RAIPUR:

राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने के लिए कॉलोनी चलन बढ़ने लगा इसके साथ ही कॉलोनी के रखरखाव, साफ सफाई के लिए कॉलोनी के निवासियों के द्वारा कुछ व्यक्तियों को चुनकर सोसाइटी का गठन किया जाने लगा|

सोसाइटी का गठन कॉलोनी के निवासियों के द्वारा चुनाव करके किया जाता जिसमें कुछ पद बनाए जाते हैं जैसे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सहसचिव, खजांची व सदस्य उक्त सभी पदों के अधिकार निर्धारित करने के लिए एक नियमावली बनाई जाती है नियमावली में बनाए गए नियमों के अनुसार पूरी सोसाइटी कार्य करती है जिस पर सोसाइटी में कैसे चुनाव किया जाएगा, चुने जाने के बाद पदाधिकारियों का क्या कार्य होगा सभी बातें उक्त नियमावली में लिखी रहती है नियमावली को बनाने के बाद संस्था को पंजीकृत करना पड़ता है पंजीकृत संस्था ही मान्य होती हैं एवं मान्य संस्था का ही किसी बैंक में खाता खुल सकता है परंतु राज्य में बड़ी-बड़ी कॉलोनियों में संस्था तो बनाई गई हैं पर ना तो उन्हें रजिस्टर्ड किया जाता है और ना ही कोई हिसाब किताब जवाबदारी लेता है

 संस्था के पदाधिकारी रख-रखाव, साफ सफाई के लिए राशि, निवासरत रहवासियों से एकत्रित तो करते हैं पर उसका हिसाब किताब नहीं रखते हुए रहवासियों की राशि का दुरुपयोग करते हैं कई कॉलोनियों की संस्था का हिसाब किताब का कोई अता पता ही नहीं है और वहां निवासरत रहवासी अपने आप को लाचार समझते हुए कुछ कर नहीं पाते क्योंकि ना तो संस्था की कोई नियमावली होती है और ना ही संस्था का चुनाव सही तरीके से किया जाता है पद प्राप्त करने के बाद संस्था के पदाधिकारी मनमानी करते हुए गलत निर्णय लेते हैं | कॉलोनी में रहने वाले लोगों को जिन नियमों का पालन करना पड़ता है वह नियम ऐसे पदाधिकारियों के द्वारा बनाए जाते हैं जो खुदी किसी नियम का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है

नियमावली अगर बनाई जाए उसमें सभी नियम रहते हैं जैसे संस्था के अध्यक्ष को क्या अधिकार है एवं वह कितनी राशि खर्च करने का निर्णय ले सकते हैं इसके साथ ही संस्था के सचिव के अधिकार, खजांची के अधिकार नियमावली मे विस्तृत रूप से लिखें रहते है इसके अलावा अगर खर्च की राशि ज्यादा होती है तो संस्था को एक परचेज कमेटी का गठन करके निर्णय लेना होता है उक्त कमेटी अपने निर्णय से संस्था की कार्यकारिणी को अवगत कराती है जिससे पारदर्शिता बनी रहती है परंतु पद प्राप्त होने के बाद संस्था के कुछ पदाधिकारी अपने आप खर्च करने के निर्णय ले लेते हैं जिसकी जानकारी कई बार अन्य पदाधिकारीयो को भी नहीं होती है उक्त निर्णय संस्था की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं

गणेश जी और दुर्गा मां की स्थापना के समय तो संस्था के पदाधिकारी सारी हदें पार कर देते हैं चंदे के रूप में मिलने वाली राशि का कोई हिसाब किताब वे नहीं बनाते की उक्त राशि का उपयोग वे कहां करते हैं इसकी जानकारी किसी को नहीं दी जाती अगर कोई निवासी इस बारे में प्रश्न उठाता है तो उसको यह बताया जाता है की जितनी राशि प्राप्त हुई थी उतना ही खर्चा था परंतु विस्तृत जानकारी कभी नहीं मिलती

हैरान करने वाली बात यह भी है की करोड़ों रुपए के इस घपले में बैंक भी सहभागी बन जाते हैं किसी भी बैंक में खाता खोलने के लिए संस्था का पंजीयन प्रमाण पत्र व संस्था का पैन कार्ड जरूरी होता है परंतु बैंकों में ऐसी कई संस्थाओं का अकाउंट चालू अवस्था में है जिनका ना तो पंजीयन हुआ है और ना ही कोई पैन कार्ड है

#TRENDING
WhatsApp      Gmail    

Copyright 2020, Himaksh Enterprises | All Rights Reserved